जिला के बारे में

विदिशा भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह मालवा के उपजाऊ पठारी क्षेत्र के उत्तर- पूर्व हिस्से में अवस्थित है तथा पश्चिम में मुख्य पठार से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र मध्यभारत का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा सकता है। नगर से दो मील उत्तर में जहाँ इस समय बेसनगर नामक एक छोटा-सा गाँव है, प्राचीन विदिशा बसी हुई है। यह नगर पहले दो नदियों के संगम पर बसा हुआ था, जो कालांतर में दक्षिण की ओर बढ़ता जा रहा है। इन प्राचीन नदियों में एक छोटी-सी नदी का नाम वैस है। इसे विदिशा नदी के रुप में भी जाना जाता है।

प्राचीन नगर विदिशा तथा उसके आस-पास के क्षेत्र को अपनी भौगोलिक विशिष्टता के कारण एक साथ दशान या दशार्ण (दस किलो वाला) क्षेत्र की संज्ञा दी गई है। यह नाम छठी शताब्दी ई. पू. से ही चला आ रहा है। इस नाम की स्मृति अब भी बेतवा की सहायक नदी धसान नदी के नाम में अवशिष्ट है। कुछ विद्वान इसका नामाकरण दशार्ण (धसान) नदी के कारण मानते हैं, जो दस छोटी-बड़ी नदियों के समवाय- रूप में बहती थी। जहाँ प्राचीन संस्कृत- साहित्य में विदिशा का नाम वैदिस, वेदिश या वेदिसा मिलता है, वहीं पाली ग्रंथों में इसे वेसनगर, वैस्सनगर, वैस्यनगर या विश्वनगर कहा गया है। कुछ विद्धानों का मानना है कि विविध दिशाओं को यहाँ से मार्ग जाने के कारण ही इस नगर का नाम विदिशा पड़ा।

ऐतिहासिक नगरी होने के कारण विदिशा की प्राचीन इमारते और स्थापत्य दर्शनीय हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ प्राकृतिक स्थल और धार्मिक महत्व के स्थान भी देखने के योग्य हैं। विदिशा के निकटवर्ती छोटे छोटे नगर अपने में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए हैं। अतः इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए इनको देखना भी रुचिकर है। प्राकृतिक स्थलों में लुहांगी गिरिश्रेणी विदिशा नगर के मध्य रेलवे स्टेशन के निकट ही स्थित है जहाँ से रायसेन का किला, साँची की पहाड़ियाँ, उदयगिरि की श्रेणियाँ, वैत्रवती नदी व उनके किनारों पर लगी वृक्षों की श्रृंखलाएँ अत्यंत सुदर दिखती है। चरणतीर्थ में च्वयन ॠषि ने की तपस्थली तथा संगम दर्शनीय हैं। ऐतिहासिक भवनों में विदिशा का किला और विजय मंदिर, विदिशा पर्यटकों के लिए रोचक हैं। इसे अतिरिक्त ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के अनेक छोटे नगर विदिशा के पास बसे हुए है जो पर्यटकों को लुभाते हैं। इनमें बेसनगर, जिसे पाली बौद्ध ग्रंथों में वेस्सागर कहा गया है, भद्दिलपुर जो जैनियों के दसवें तीथर्थंकर भगवान शीतलनाथ की जन्मभूमि है, उदयगिरि की गुफाएँ जो ४वीं- ५वीं सदी पुरानी हैं पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनती हैं। कई इमारतें व उनसे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के समेटे सिरोंज, नंदवंशी अहीर ठाकुरों की भूमि लटेरी, परमारवंशीय राजा उदयदित्य के स्वर्णकाल का प्रतीक उदयपुरा, पहाड़ी की उपत्यका में बसा ग्यारसपुर, ऐतिहासिक नगर शम्शाबाद, बौद्ध स्तूपों के लिए जाना जाने वाला साँची, रंगाई-छपाई कार्य के लिए प्रसिद्ध गंज बासौदा, रमणीय सरोवर के निकट बसा बढ़ोह और सातखनी हवेली के लिए प्रसिद्धमरखेड़ा विदिशा जिले के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं।